ला नीना की आहट: अगले 3 महीनों में बदल सकता है मौसम, WMO की चेतावनी
अप्रैल, 9 2026
मौसम का मिजाज बदलने वाला है और इस बार संकेत प्रशांत महासागर की गहराइयों से आ रहे हैं। विश्व मौसम संगठन (WMO)
ने बुधवार को यह आगाह किया है कि अगले तीन महीनों के भीतर ला नीना की परिस्थितियां विकसित हो सकती हैं। हालांकि, घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि डेटा कहता है कि यह बदलाव अपेक्षाकृत कमजोर और कम समय के लिए होगा। आसान शब्दों में कहें तो, यह एक ऐसा मौसम चक्र है जो दुनिया के एक कोने में पानी का तापमान बदलता है और उसका असर हमारे देश की बारिश और ठंड पर पड़ता है।ताजा आंकड़ों की बात करें तो WMO के वैश्विक दीर्घकालिक पूर्वानुमान केंद्रों के मुताबिक, ला नीना के विकसित होने की संभावना 55 प्रतिशत है। दिलचस्प बात यह है कि उतनी ही संभावना (55%) तटस्थ परिस्थितियों (Neutral Conditions) में बने रहने की भी है। इसका मतलब है कि मौसम वैज्ञानिक अभी पूरी तरह निश्चित नहीं हैं, लेकिन संकेत 'ठंडक' की ओर इशारा कर रहे हैं।
आखिर क्या है यह 'ला नीना' और यह कैसे काम करता है?
अगर आप इसे सरल भाषा में समझना चाहें, तो ला नीना असल में ENSO (एल नीनो दक्षिणी दोलन) का 'शीत चरण' है। यह तब होता है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी कम हो जाता है।
लेकिन यह तापमान गिरता कैसे है? खेल शुरू होता है व्यापारिक पवनों (Trade Winds) से। ला नीना के दौरान, ये हवाएं सामान्य से कहीं ज्यादा ताकतवर हो जाती हैं और गर्म पानी को पश्चिम की ओर, यानी इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेल देती हैं। जब गर्म पानी वहां चला जाता है, तो गहराई से ठंडा और पोषक तत्वों से भरपूर पानी सतह पर आ जाता है (जिसे अपवेलिंग कहते हैं), जिससे समुद्र का तापमान गिर जाता है।
तकनीकी रूप से देखें तो, यदि पांच लगातार तिमाहियों तक तापमान में 0.9 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा की गिरावट देखी जाए, तभी इसे आधिकारिक तौर पर ला नीना कहा जाता है। इसकी तीव्रता को मापने के लिए विशेषज्ञ 'महासागरीय नीनो सूचकांक' (ONI) का सहारा लेते हैं।
एल नीनो से कितना अलग है ला नीना?
अक्सर लोग इन दोनों में भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन ये एक ही सिक्के के दो अलग पहलू हैं। जहाँ एल नीनो 'गर्म अवस्था' है, वहीं ला नीना 'ठंडी अवस्था' है। एक बड़ा अंतर इनकी अवधि का है। एल नीनो आमतौर पर एक साल तक ही रहता है, लेकिन ला नीना जिद्दी होता है; यह एक से तीन साल तक खिंच सकता है। हालांकि, ज्यादातर मामलों में यह 9 से 12 महीने तक चलता है।
यहां एक छोटा सा तुलनात्मक चार्ट देखें:
- तापमान: एल नीनो में समुद्र गर्म होता है, ला नीना में ठंडा।
- अवधि: एल नीनो छोटा (1 वर्ष), ला नीना लंबा (1-3 वर्ष)।
- भारतीय प्रभाव: एल नीनो से सूखा/कम बारिश, ला नीना से अच्छी बारिश और अधिक ठंड।
भारत और दुनिया पर इसका क्या असर होगा?
भारत के लिए ला नीना एक 'वरदान' जैसा हो सकता है, खासकर किसानों के लिए। जब ला नीना सक्रिय होता है, तो भारत में मानसून मजबूत होता है और औसत से अधिक वर्षा होती है। लेकिन इसके साथ ही सर्दियों में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। उत्तर-पश्चिमी भारत में मौसम काफी ठंडा हो जाता है, जबकि दक्षिण-पूर्व में हल्का गर्म रह सकता है।
दुनिया के बाकी हिस्सों की बात करें तो दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियां बन सकती हैं। वहीं, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। यूरोप का हाल तो और भी अजीब होता है—उत्तरी यूरोप (जैसे ब्रिटेन) में सर्दियां कम ठंडी हो सकती हैं, जबकि दक्षिण-पश्चिमी यूरोप और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में भारी बर्फबारी देखी जा सकती है।
जलवायु परिवर्तन: एक चिंताजनक मोड़
यहाँ एक बड़ा ट्विस्ट है। WMO ने चेतावनी दी है कि ला नीना और एल नीनो जैसी प्राकृतिक घटनाएं अब केवल प्रकृति के भरोसे नहीं हैं। मानवजनित जलवायु परिवर्तन (Climate Change) इन घटनाओं के पैटर्न को बदल रहा है। इंसानी गतिविधियों की वजह से बढ़ता तापमान इन प्राकृतिक चक्रों को और अधिक अनिश्चित बना रहा है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि वायुमंडलीय दाब में बदलाव और समुद्र की धाराओं की बदलती गति का सीधा संबंध ग्लोबल वार्मिंग से है। यह सिर्फ मौसम का बदलना नहीं है, बल्कि एक वैश्विक संकेत है कि हमारी धरती का संतुलन बिगड़ रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
ला नीना का भारतीय मानसून पर क्या असर पड़ता है?
ला नीना की स्थिति में भारत में मानसून आमतौर पर बहुत मजबूत होता है। इससे देश के अधिकांश हिस्सों में औसत से अधिक वर्षा होती है, जो खेती के लिए फायदेमंद है। हालांकि, इसके कारण सर्दियों के मौसम में ठंड बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
ला नीना और एल नीनो में मुख्य अंतर क्या है?
एल नीनो प्रशांत महासागर के पानी को गर्म करता है, जिससे भारत में सूखा पड़ने की संभावना रहती है। इसके विपरीत, ला नीना पानी को ठंडा करता है, जिससे अधिक बारिश होती है। ला नीना की अवधि भी एल नीनो के मुकाबले ज्यादा लंबी होती है।
ला नीना कितनी अवधि के लिए आता है?
आम तौर पर ला नीना की घटनाएं 9 से 12 महीनों तक चलती हैं। लेकिन कुछ शक्तिशाली मामलों में यह प्रभाव एक साल से लेकर तीन साल तक भी बना रह सकता है, जो इसे एल नीनो से अधिक टिकाऊ बनाता है।
WMO के अनुसार इस बार ला नीना की क्या स्थिति है?
विश्व मौसम संगठन के अनुसार, अगले तीन महीनों में ला नीना विकसित होने की 55% संभावना है। हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार यह चरण अपेक्षाकृत कमजोर होगा और बहुत अधिक समय तक नहीं चलेगा।
क्या जलवायु परिवर्तन ला नीना को प्रभावित कर रहा है?
हाँ, WMO ने चेतावनी दी है कि मानवीय कारणों से होने वाले जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक घटनाओं जैसे ला नीना और एल नीनो के व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे मौसम के पैटर्न और अधिक अप्रत्याशित और तीव्र हो रहे हैं।
